संस्कृत को जनभाषा बनाना संस्कृत भारती का उद्देश्य : डॉ. त्रिपुरारी मिश्र
संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिन सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन, विभिन्न विद्यालयों में सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
देवरिया, 25 अगस्त 2026। संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने और भारतीय ज्ञान परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से जनपद देवरिया में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के साथ हुआ। जनपद के विभिन्न विद्यालयों में बनाए गए निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें शताधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

संस्कृत केवल अतीत नहीं, भविष्य की भी भाषा
प्रतियोगिता के अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. दुर्गेश पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं है, बल्कि भविष्य की भी भाषा है। संस्कृत एक संस्कारित और अत्यंत समृद्ध भाषा है, जिसकी वैज्ञानिकता विभिन्न स्तरों पर प्रमाणित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को अतीत के गौरव के साथ-साथ भावी विश्व के मंगल और कल्याण की भाषा के रूप में भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थियों और नई पीढ़ी में प्राचीन भारतीय विज्ञान, ज्ञान-विज्ञान और रहस्यों को जानने के प्रति आकर्षण पुनः बढ़ रहा है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए एक सकारात्मक संकेत है। भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए संस्कृत सबसे प्रमाणित प्रवेश द्वारों में से एक है।

भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का माध्यम है संस्कृत
डॉ. पाण्डेय ने कहा कि भारत की प्राचीन साहित्यिक, दार्शनिक और वैज्ञानिक परंपरा का विशाल भंडार संस्कृत साहित्य में सुरक्षित है। इसलिए विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के प्रति प्रेरित किया जाना आवश्यक है। संस्कृत के माध्यम से युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को जानने के साथ-साथ उससे भविष्य के लिए प्रेरणा भी प्राप्त कर सकती है।

संस्कृत को जनभाषा बनाना उद्देश्य : डॉ. त्रिपुरारी मिश्र
संस्कृत भारती देवरिया के जिला संयोजक डॉ. त्रिपुरारी मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा को पुनः जनभाषा बनाने और नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि बढ़ाने के लिए संस्कृत भारती निरंतर नूतन प्रयोग कर रही है। इसी श्रृंखला में संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत सप्ताह का आयोजन रक्षाबंधन से तीन दिन पहले और तीन दिन बाद तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संस्कृत को विद्यालयों तक सीमित रखने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है।

सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता से हुआ संस्कृत सप्ताह का आगाज
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के जनपद कार्यक्रम संयोजक श्री फणीन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिन सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके लिए जनपद के विभिन्न विद्यालयों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

केन्द्रम् – केशव सरस्वतीउच्चतर माध्यमिक विद्यामन्दिर, रूद्रपुर, देवरिया।
उन्होंने बताया कि ज्ञान प्रकाश इंटर कॉलेज भलुअनी, श्री दुर्गाजी गर्ल्स इंटर कॉलेज भीखमपुर रोड, जगदेव पब्लिक स्कूल बड़हरा, भगिनी निवेदिता बालिका विद्यालय देवरिया, केशव सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यामंदिर रुद्रपुर, एन.के. मेमोरियल सलेमपुर, मां चंद्रावती विद्यालय नूंनखार भटनी तथा सनवीन स्कूल देवरिया सहित निर्धारित केंद्रों पर परीक्षा संपन्न हुई।

शताधिक विद्यार्थियों ने उत्साह से लिया हिस्सा
प्रतियोगिता में शताधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सामान्य ज्ञान के प्रश्नों का उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रति अपनी जानकारी बढ़ाने और अपनी प्रतिभा को परखने का अवसर मिला।
विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार से किया जाएगा सम्मानित
आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि विद्यार्थियों को सम्मानित करने से उनमें संस्कृत के प्रति उत्साह और अध्ययन की रुचि और अधिक बढ़ेगी।

पूरे सप्ताह होंगे विभिन्न कार्यक्रम
संस्कृत सप्ताह के आगामी दिनों में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जनसंपर्क अभियान चलाने के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत को सरल, सहज और व्यवहारिक भाषा के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा।

आयोजकों ने कहा कि संस्कृत केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान, साहित्य और संस्कारों की समृद्ध परंपरा से जोड़ने वाली भाषा है। संस्कृत सप्ताह जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
