सलेमपुर (देवरिया): जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल का प्रांगण बीते दिन एक बेहद भावुक और गरिमामयी क्षण का साक्षी बना। यह दिन था संस्था के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र को याद करने का। यह सभा केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि यह उनके द्वारा दिखाए गए शिक्षा और संस्कृति के मार्ग को पुनर्जीवित करने का एक संकल्प था।
एक युगदृष्टा का स्मरण
जी एम एकेडमी के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में डॉ. काशीनाथ मिश्र को उस ‘ध्रुवतारा’ के रूप में याद किया, जिसकी रोशनी संस्था की नींव को आज भी मार्ग दिखा रही है। मुख्य शाखा के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने डॉ. मिश्र के जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा करते हुए कहा कि, “डॉ. मिश्र महज एक शिक्षाविद नहीं थे, वे भारतीय संस्कृति, संस्कृत और संस्कारों के सच्चे प्रहरी थे।”
उन्होंने पी.जी. कॉलेज आश्रम, बरहज के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे डॉ. मिश्र ने अपने शिष्यों को न केवल किताबी ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन के कठिन संघर्षों में अडिग रहने के संस्कार भी सिखाए। आज उनके पढ़ाए छात्र समाज के हर क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं।
विरासत को विस्तार देती नई पीढ़ी
डॉ. काशीनाथ मिश्र द्वारा रोपित शिक्षा का यह पौधा आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। प्रधानाचार्य ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि कैसे संस्था आज सलेमपुर के साथ-साथ गोरखपुर और बरहज में भी उत्कृष्टता का झंडा गाड़ रही है। इस विकास यात्रा में विद्यालय के चेयरमैन डॉ. श्री प्रकाश मिश्र और निदेशिका डॉ. संभावना मिश्रा के कुशल नेतृत्व और त्याग को विशेष रूप से सराहा गया। वक्ताओं ने माना कि आधुनिक दौर की तकनीक और प्राचीन मूल्यों का जो संगम जी एम एकेडमी में देखने को मिलता है, वह वास्तव में डॉ. मिश्र के दूरदर्शी विचारों का ही परिणाम है।
भावनाओं का सैलाब: पुष्पांजलि सभा
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब विद्यालय परिवार के सदस्यों ने बारी-बारी से उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान शिक्षकगण—दिलीप कुमार सिंह, श्वेता राज, साक्षी, जोया, पी. गोस्वामी, धर्मेंद्र मिश्र, राकेश मिश्रा, रेनू सिंह, अल्का दीक्षित, पल्लवी, कृष्णा, आशुतोष, कुडूस, पुरंजय, आदित्य, अमुल्य—सहित तमाम कर्मचारियों और विद्यार्थियों की आंखें नम थीं। यह दृश्य बताता था कि डॉ. मिश्र का व्यक्तित्व कितना व्यापक और प्रेरणादायी रहा है।
विद्यार्थियों के लिए जीवन-दर्शन
इस श्रद्धांजलि सभा ने छात्रों को एक गहरा सबक दिया। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता के साथ-साथ एक बेहतर इंसान बनने की कोशिश करेंगे, जैसा कि डॉ. मिश्र का सपना था। उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल सफलता की सीढ़ी चढ़ना नहीं, बल्कि सत्य, ईमानदारी और सेवा जैसे मूल्यों को अपने चरित्र का हिस्सा बनाना है।
निष्कर्ष स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र के जीवन का सार यही है कि जो व्यक्ति अपने कर्मों से समाज को दिशा देता है, वह कभी ओझल नहीं होता। जी एम एकेडमी का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भले ही डॉ. मिश्र भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श आज भी संस्था की हर ईंट और हर विद्यार्थी की सफलता में जीवित हैं। विद्यालय परिवार ने उनके दिखाए रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ने का प्रण लेकर इस कार्यक्रम का समापन किया।
